भारत के जनजातीय समुदायों — भील, भिलाला और अन्य — ने सदियों से प्रकृति के साथ संतुलित जीवन जिया है।
लेकिन आधुनिक आर्थिक और शैक्षणिक ढाँचों में उनके ज्ञान और परम्पराओं को साझा करने का कोई संगठित मंच नहीं था।
झाबुआ संवाद इन पाँच स्तंभों पर टिका है
कार्यक्रम की विस्तृत रूपरेखा


यह आयोजन समाज के हर वर्ग को एक मंच पर लाता है। ज्ञान, कला, उद्यम और सेवा — सभी के लिए यहाँ स्थान है।
झाबुआ संवाद एक तीन-स्तरीय संरचना पर आधारित है जो पारदर्शिता और जिम्मेदारी सुनिश्चित करती है।
यह आयोजन तीन स्रोतों से वित्त पोषित होगा जिससे यह सुनिश्चित हो सके कि कोई भी युवा भागीदारी से वंचित न रहे।
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